कोरोना वायरस क्या गर्मी से मर जाता है?

कोरोना वायरस का पहला मामला बीते साल दिसंबर में चीन के वुहान में सामने आया था.

उसके बाद से ये वायरस धीरे-धीरे दुनिया के 168 देशों में अपने पैर पसार चुका है. इसे लेकर दुनिया भर में सरकारें अपने नागरिकों को सतर्क कर रही हैं और इस वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जानकारी साझा कर रही हैं. लेकिन इसे लेकर अफवाहों का बाज़ार भी गर्म है, और इस कारण लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं.

कई जगह इस तरह के दावे किए दावे किए जा रहे हैं कि गर्मी की मदद से कोरोना वायरस को ख़त्म किया जा सकता है. कई दावों में पानी को गर्म करके पीने की सलाह दी जा रही है. यहां तक कि नहाने के लिए गर्म पानी के इस्तेमाल की बात कही जा रही है.

बीते कई दिनों से सोशल मीडिया पर इस तरह के दावों की भरमार है. एक पोस्ट जिसे कई देशों में हज़ारों लोगों ने शेयर किया है, उसमें दावा किया गया कि गर्म पानी पीने और सूरज की रोशनी में रहने से इस वायरस को मारा जा सकता है. इस दावे में आइसक्रीम को ना खाने की सलाह भी दी गई.

इतना ही नहीं इस मैसेज के साथ फ़र्ज़ी तरीक़े से यह भी बताया जा रहा है कि ये तमाम बातें यूनिसेफ़ ने कही हैं.

कोरोनावायरस फैलता कैसे है?

बीबीसी ने इन दावों के बारे में और जानने के यूनिसेफ़ के लिए काम करने वालीं चार्लेट गोर्निज़्क से संपर्क किया. उन्होंने इस दावों को सिरे से नकारते हुए इन्हें भ्रामक बताया.

उनका कहना है, “हाल ही में एक मैसेज यूनिसेफ़ के नाम से ऑनलाइन फैलाया जा रहा है कि आइसक्रीम और ठंडी चीज़ों से दूर रहने से इस वायरस से बचा जा सकता है, यह पूरी तरह से झूठा मैसेज है.”

जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैल जाते हैं. इन्हीं नन्हें कणों के ज़रिए कोरोना वायरस फैलता है. व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण यानी ड्रॉपलेट्स शरीर से बाहर आते हैं.

संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. कभी कभी ये कण कपड़ों, दरवाज़ों के हैंडल और आपके सामान पर गिर सकते हैं. उस जगह पर किसी का हाथ पड़े और फिर वो व्यक्ति उसी संक्रमित हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह छूता है तो उसे कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है.

वायरस शरीर से बाहर कितनी देर रहता है?

अमरीकन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑर हेल्थ ने अपने रिसर्च में पाया है कि ये थूक के कणों में वायरस 3-4 घंटों तक ज़िंदा रह सकते हैं और हवा में तैर सकते हैं. लेकिन अगर ये कण दरवाज़े का हैंडल, लिफ्ट बटन जैसे धातु जैसी सतहों पर ये 48 घंटों तक एक्टिव रह सकते हैं.

वहीं अगर कण स्टील की सतह पर गिरा तो गिरा तो वो 2-3 दिन तक एक्टिव रह सकता है. कुछ पुराने रिसर्च के आधार पर ये भी कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस अनुकूल परिस्थितियों में एक हफ्ते तक भी एक्टिव रह सकते हैं. कपड़ों जैसे नरम सतहों पर कोरोना वायरस बहुत लंबे वक्त तक नहीं जिंदा रहता.

ऐसे में अगर आप एक दो दिन तक एक ही कपड़ा नहीं पहनते तो वायरस एक्टिव नहीं रहेगा. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि किसी संक्रमित सतह को छूने से आपको कोरोना वायरस हो ही जाएगा. जब तक ये आपके मुंह, आंख, नाक के ज़रिए आपके शरीर में नहीं जाता, तब तक आप ठीक हैं.

इसलिए अपने मुंह को छूना या बिना हाथ धोए खाना बंद कर दें. इसका मतलब है कि जिसको कोरोना हुआ है और उसने कुछ छुआ या छींका तो वही चीज़ आपने छू ली और आंख नाक मुंह के ज़रिए आपके शरीर में वायरस चला गया तो संक्रमण हो सकता है. ये ध्यान रहे कि सिर्फ छूने से नहीं, बल्कि आपके शरीर में जाने से संक्रमण होगा.

गर्मी से कितना प्रभाव पड़ेगा?

कोरोना वायरस 60 से 70 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक नष्ट नहीं हो सकता. उतना तापमान ना तो भारत में है और ना किसी के शरीर के भातर. कुछ वायरस तापमान बढ़ने के बाद नष्ट होते हैं लेकिन कोरोना वायरस पर बढ़ते तापमान का क्या असर होगा?

इसके बारे में ब्रितानी डॉक्टर सारा जार्विस कहती हैं कि 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी जो जुलाई में खत्म हो गई थी. लेकिन ये तापमान बदलने की वजह से हुआ या किसी और वजह से ये बताना मुश्किल है.

वायरस पर शोध करने वाले डॉक्टर परेश देशपांडे का कहना है कि अगर कोई भरी गर्मी में छींका तो थूक के डॉपलेट सतह पर गिर कर जल्दी सूख सकते हैं और कोरोना फैसले का संक्रमण कम हो सकता है.

हम जानते हैं कि फ्लू वायरस गर्मियों के दौरान शरीर के बाहर नहीं रह पाते लेकिन हमें इस बारे में नहीं पता कि कोरोना वायरस पर गर्मी का क्या असर पड़ता है. तो कहा जा सकता है कि गर्मी में कोरोना नष्ट होगा इसका कोई ठोस सबूत नहीं है. तापमान के भरोसे मत बैठिए.

COVID-19

यातायात संबंधी प्रतिबंध

कोरोनावायरस दुनिया भर में 168 देशों में फैल चुका है जिनमें ग्रीनलैंड जैसे ठंडे देश भी है तो दुबई जैसे गर्म शहर भी, मुंबई जैसे ह्यूमिड शहर भी हैं तो दिल्ली जैसे सूखे शहर भी.

एक बार अगर यह वायरस इंसान के शरीर में घुस गया तो इसे मारने का तरीक़ा अभी तक नहीं ईजाद नहीं हो पाया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई देश इस पर काम कर रहे हैं लेकिन अब तक इसे मारने वाले कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है.

इसी कारण सरकारें इससे बचने के तरीकों के बारे में नागरिकों को बता रही हैं. वो यातायात संबंधी प्रतिबंध लगा रही हैं और लोगों से एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए कह रही हैं.

इस वायरस से हमारे शरीर को ही लड़ना होगा यानी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को ही इसे हराना होगा. हम अपनी बेडशीट को धोकर रखें तो इस वायरस को वहां से तो हटाया जा सकता है, लेकिन शरीर में घुस चुके वायरस को शरीर धोकर बाहर नहीं निकाला जा सकता.

Courtesy: bbc.com/hindi/social-51971562

https://www.bbc.com/hindi/social-51971562

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